बुधवार, 24 अक्टूबर 2007

नेता जी का कुर्सी प्रेम (व्यंग्य कविता)

एक नेता जी,
कुर्सी के प्रेम में,
ऐसे खोने लगे।
शयन कक्ष से,
पलंग हटाकर,
कुर्सी पर ही सोने लगे।।

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